रूस और भारत : आधुनिक चुनौतियों का जवाब

Monday, 17 August 2015 09:26

भारत के स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर संवाद समिति ’स्पूतनिक’ को इण्टरव्यू देते हुए भारत में रूस के राजदूत अलेक्सान्दर कदाकिन ने कहा -

  विगत जुलाई के महीने में रूस में हुए ब्रिक्स और शंसस (शंघाई सहयोग संगठन) के शिखर-सम्मेलनों ने एक बार फिर से दिखाया कि रूस और भारत के नज़रियों में बहुत ज़्यादा समानता है और ये दोनों देश फ़ौरी अन्तरराष्ट्रीय समस्याओं का समाधान करने और बहुध्रुवीय दुनिया को मज़बूत बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

  उन्होंने कहा कि भारत हमारे इस नज़रिए से पूरी तरह सहमत है कि सँयुक्त राष्ट्र संघ की सहमति के बिना एकतरफ़ा ढंग से लगाए गए आर्थिक प्रतिबन्धों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। ऊफ़ा में हुई मुलाक़ात के दौरान भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के इस नज़रिए की पुष्टि की कि इस तरह की कार्रवाइयाँ विश्व की अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुँचाती हैं। इसलिए ब्रिक्स दल के देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने के लिए काम करना बेहद ज़रूरी है।

  ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विश्व वित्तीय प्रणाली के पुराने हो चुके मॉडल को बदलने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया और ऐसी नई संस्थाओं का निर्माण करने की बात कही गई जो आधुनिक चुनौतियों के अनुकूल हों। भारत में रूस के राजदूत अलेक्सान्दर कदाकिन ने कहा — नए ब्रिक्स विकास बैंक के गठन और आरक्षित मुद्राओं की सूची पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है। भारत में लोगों को आशा है कि इन नई संस्थाओं की गतिविधियाँ शुरू होने के बाद ढाँचागत परियोजनाओं पर तथा सामाजिक और मानवीय कार्यक्रमों पर अमल करने के लिए ऋण लेना आसान हो जाएगा, जिसका अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर सकारात्मक असर पड़ेगा। नरेन्द्र मोदी द्वारा सीमाकर विहीन व्यापार समझौता करने, ब्रिक्स देशों का पहला व्यापार मेला आयोजित करने, रेलमार्गों के निर्माण के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग करने तथा कृषि क्षमता का विकास करने से जुड़े जो प्रस्ताव रखे गए, उनका ऊँचा मूल्यांकन किया गया।

  भारत में रूस के राजदूत अलेक्सान्दर कदाकिन ने कहा — भारत के राजनीतिक क्षेत्रों मे ऊफ़ा को अब इसलिए याद किया जाता है क्योंकि ऊफ़ा में ही भारत को शंसस (शंघाई सहयोग संगठन) का पूर्णाधिकार प्राप्त सदस्य बनाने के लिए कार्यवाही शुरू की गई। भारत के शंसस का सदस्य बनने से शंसस की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और अन्तरराष्ट्रीय मंच पर उसकी भूमिका और ज़्यादा मज़बूत होगी। शंसस शान्ति और सुरक्षा के हित में, आतंकवाद व नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए तथा वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों व ख़तरों का सामना करने में सक्रिय रूप से भूमिका निभाएगा। अफ़ग़ानिस्तान की परिस्थिति को स्थिर और नियमित करने तथा आतंकवादी गिरोह ’इस्लामी राज्य’ तथा अन्य कट्टरपन्थी उग्रवादी इस्लामी गुटों के विरुद्ध संघर्ष करने की दृष्टि से शंसस की भूमिका विशेष रूप से सामयिक होगी।

  ऊफ़ा शिखर सम्मेलनों के दौरान ही रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन और भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की दुपक्षीय मुलाक़ात भी हुई। इस साल के अन्त तक नरेन्द्र मोदी एक बार फिर रूस की यात्रा करेंगे। नरेन्द्र मोदी की अगली रूस-यात्रा की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। जल्दी ही दो देशों के अन्तरसरकारी आयोगों और कार्यदलों की बैठकें होंगी, जिनमें वे विषय तय किए जाएँगे, जिनपर दो देशों के नेता अपनी मुलाक़ात के दौरान चर्चा करेंगे। भावी मास्को शिखर-सम्मेलन से हमारे दो देशों के रिश्तों को नई प्रेरणा मिलेगी। इस शिखर सम्मेलन के दौरान ऐसे नए विचार सामने आएँगे जो रूसी भारतीय सहयोग को प्रोत्साहित करेंगे और समृद्ध करेंगे।

www.in.sputniknews.com, 15.08.2015

 

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