भारत-रूस सहयोग की एक महत्त्वपूर्ण दिशा - सैन्य-तकनीक क्षेत्र

Monday, 17 August 2015 09:22

संवाद समिति ’स्पूतनिक’ को इण्टरव्यू देते हुए भारत स्थित रूस के राजदूत अलेक्सान्दर कदाकिन ने कहा -- सैन्य-तकनीकी सहयोग रूस और-भारत के बीच किए जा रहे आपसी सहयोग का एक महत्त्वपूर्ण और उल्लेखनीय हिस्सा है।

  भारत में रूस के राजदूत अलेक्सान्दर कदाकिन ने भारत के स्वतन्त्रता दिवस की पूर्ववेला में यह इण्टरव्यू दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत को हथियारों की सीधी सप्लाई करने और भारत में ही भारत के साथ मिलकर सँयुक्त रूप से विभिन्न प्रकार के हथियारों का उत्पादन करने वाला रूस भारत का एक प्रमुख सहयोगी देश है। भारतीय नौसेना आज 80 प्रतिशत तक रूसी उपकरणों और रूसी हथियारों से लैस है, जबकि भारतीय वायुसेना में भी 70 प्रतिशत हथियार  और उपकरण रूस में उत्पादित हैं। दुनिया के किसी भी दूसरे देश के साथ भारत इतने विशाल स्तर पर सहयोग नहीं करता है।

  इस क्षेत्र में सहयोग का मुख्य आधार सन 2011 से 2020 तक सैन्य तकनीकी क्षेत्र में सहयोग के बारे में बनाया गया कार्यक्रम और दो देशों के बीच हुए 20 अन्तरसरकारी समझौते हैं। ये समझौते 35 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के हैं। भारत ने इतने बड़े सहयोग-समझौते दुनिया के किसी भी दूसरे देश के साथ नहीं किए हैं।

  भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के कार्यक्रम में यह सुनिश्चित किया गया है कि भारत विदेशों से बीसियों करोड़ डॉलर के आधुनिक और नवीनतम हथियार ख़रीदेगा। और रूसी हथियारों को भारत प्राथमिकता दे रहा है। इस क्षेत्र में रूसी भारतीय सहयोग पूरी तरह से आपसी विश्वास पर आधारित है और पूरी तरह से गुप्त है। रूस के राजदूत के अनुसार — इस दिशा में दो देशों के बीच आपसी सहयोग का मूल्यांकन भावी योजनाओं या पारस्परिक रूप से किए गए अनुबन्धों के आधार पर नहीं, बल्कि उन सँयुक्त परियोजनाओं के आधार पर किया जाना चाहिए, जिन पर इन दिनों अमल किया जा रहा है और जो भविष्य में पूरी होंगॊ। जैसे सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस की बात की जानी चाहिए, जिसे भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया है और जिसे भारतीय सेना के सभी अंगों में इस्तेमाल किए जाने के लिए बनाया जा रहा है, चाहे वह थलसेना हो, वायुसेना हो या नौसेना। इसके अलावा रूस और भारत द्वारा मिलकर बनाए जा रहे पाँचवी पीढ़ी के बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान की भी चर्चा की जा सकती है। इसके अतिरिक्त ऐसी और भी अनेक सम्भावनाशील परियोजनाएँ हैं।

  अलेक्सान्दर कदाकिन ने कहा — रूस भारत को सहज ही अपनी टेक्नोलौजी देने को तैयार है और वह भारत के साथ मिलकर फ़ौजी मालों का उत्पादन करना चाहता है। भारत के प्रधानमन्त्री द्वारा शुरू किया गया ’मेक इन इण्डिया’ अभियान रूसी और भारतीय कम्पनियों के बीच आपसी सहयोग की बड़ी सम्भावाअएँ पेश करता है। इस अभियान के अन्तर्गत रूस भारत में उन क्षेत्रों में भारत के साथ मिलकर सँयुक्त उपक्रमों का निर्माण करेगा, सैन्य-तकनीकी सहयोग और नागरिक सहयोग के जिन क्षेत्रों में दो देशों के बीच पहले से ही पारम्परिक रूप से सम्पर्क बने रहे हैं। बात मध्यम दर्जे के बहुउद्देशीय परिवहन विमान, पाँचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान तथा एम०एस-21 विमान के लिए विभिन्न हिस्सों और पुर्जों के  उत्पादन में सहयोग की हो रही है।

  अलेक्सान्दर कदाकिन ने ज़ोर दिया — हम भारत के साथ मिलकर आधुनिकतम के०ए० — 226 हैलिकॉप्टर का उत्पादन करना चाहते हैं। इसके अलावा युद्धपोतों, पनडुब्बियों, आधुनिकतम टैंकों और भारत की दिलचस्पी के अन्य हथियारों और फ़ौजी मालों का भारत में सँयुक्त रूप से उत्पादन करने के बारे में भी बातचीत चल रही है। भारत में सँयुक्त कम्पनियाँ बनाने के लिए रूस भारत की सरकारी कम्पनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की प्रमुख कम्पनियों के साथ सहयोग करने को तैयार है।

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