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अलेक्सांदर कदाकिनः "भारत मेरे दिल की धड़कन है"

Thursday, 09 October 2014 04:47

"रेडियो रूस" की संवाददाता नतालिया बेन्यूख़ को दिए अपने एक विशेष साक्षात्कार में भारत में रूस के राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन ने कहा कि  "भारत मेरा भाग्य है, भारत मेरे दिल की धड़कन है।" अभी हाल ही में रूस के राष्ट्रपति द्वारा अलेक्सांदर कदाकिन को "मैत्री पदक" से सम्मानित करने के लिए एक अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए थे।

हमारी संवाददाता ने राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन से संबोधित होकर कहा-

नतालिया बेन्यूख़ः आदरणीय अलेक्सांदर कदाकिन जी, "रूस आजकल" कंपनी और "रेडियो रूस" आपको "मैत्री पदक" से सम्मानित किए जाने के अवसर पर हार्दिक बधाई देता है। इस उच्च पुरस्कार का नाम ही पिछले कई वर्षों के दौरान पूरी दुनिया के विभिन्न देशों में आपके द्वारा किए गए उपयोगी कार्यों के सार को दर्शाता है। लेकिन फिर भी मुझे ऐसा लगता है कि भारत में एक राजनयिक के रूप में आपकी सेवा विशेष रूप से सार्थक रही है। क्या मैं सही बात कह रही हूँ?

अलेक्सांदर कदाकिनः भारत में मेरा राजनयिक सेवा काल चालीस साल से भी लंबा है। मेरे पेशेवर कैरियर की शुरुआत, दरअसल, अगस्त 1971 में भारत से ही हुई थी। तब मैं अभी मास्को अंतर्राष्ट्रीय संबंध संस्थान का छात्र था। वहाँ पर ही मेरा इस महान देश के साथ परिचय हुआ था। यह महान देश तो मेरी नियति बन गया है। मैं एक चौथाई सदी से भी अधिक समय से भारत में एक राजनयिक के रूप में सेवा की है। यह एक विश्व रिकॉर्ड है और मुझे इस बात का गर्व है। इस समय के दौरान मैंने यहाँ एक प्रशिक्षु के रूप में भी काम किया है और दो बार राजदूत के रूप में सेवा की है। मैं नेपाल और स्वीडन में भी राजदूत के रूप में सेवारत रहा था।

एक राजनयिक के रूप में मेरे जीवन में निश्चित रूप से भारत का विशेष स्थान है। मैं कई मायनों में भारत के साथ एक मज़बूत धागे से जुड़ा हुआ हूँ। शिक्षा पाते समय मैंने भारत के बारे में ज्ञान प्राप्त किया। कई वर्षों तक इस देश में रहते हुए महान अनुभव प्राप्त किया। मुझे कई राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों, वैज्ञानिकों, सैन्य कर्मियों, सांस्कृतिक अभिजात वर्ग के प्रतिनिधियों, हज़ारों भारतीय सहयोगियों के साथ संबंध स्थापित करने का अवसर मिला जो मेरे सच्चे दोस्त बने और जिन्हें मैं दिल से प्यार करता हूँ। इसके अलावा, भारत की सदियों पुरानी संस्कृति, इतिहास, इसकी विलक्षण परंपराओं के साथ स्थाई रूप से जुड़े रहने से मुझे महाम अनुभव भी प्राप्त हुआ है। मेरी इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि जब मैं अभी छात्र ही था तो मुझे भारत से सदा के लिए प्रेम हो गया था, और उसी समय से मैं भारत को अपनी कर्म भूमि, प्रेम भूमि और मैत्री भूमि मानता हूँ।

नतालिया बेन्यूख़ः ठीक ही कहा जाता है कि आप रूसी कूटनीति के गुरु हैं। आपकी सक्रिय भागीदारी से रूसी-भारतीय संबंधों का विकास हुआ है और कई नए क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है। आपकी राय में, इन संबंधों के मौजूदा स्तर का क्या महत्त्व है?

अलेक्सांदर कदाकिनः आजकल रूस और भारत के बीच संबंध एक एक बहुत ऊँचे स्तर पर विकास कर रहे हैं। इन संबंधों में परिपक्वता है, गहराई है, मज़बूती है। इन संबंधों की तीन विशेषताएँ हैं। ये विशेषताएँ हैं- आपसी सम्मान, परस्पर विश्वास और आपसी लाभ। भारत के साथ हमारी विशेषाधिकार सम्पन्न रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाना- रूस की विदेश नीति का एक मुख्य पहलू और एक सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी साझेदारी एकदम स्वाभाविक और उद्देश्यपूर्ण है और वह काफी हद तक एक साझे इतिहास और साझी उमंगों पर आधारित है। आप ख़ुद ही फैसला कर सकते हैं कि रूस और भारत- दो बहुराष्ट्रीय, बहुसांस्कृतिक और लोकतांत्रिक देश हैं जिनके राष्ट्रीय हित एक दूसरे से टकराते नहीं हैं। इसके अलावा, ज्यादातर मामलों में ये हित एक दूसरे से मेल खाते हैं। भारत हमारा एक मज़बूत सहयोगी-देश और समय की कस्वटी पर खरा उतरा साथी है। हमें व्यापार, आर्थिक विकास, सैन्य-तकनीक, निवेश और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग के अलावा अंतर्राष्ट्रीय मामलों में एक साथी के रूप में भारत की सख़्त ज़रूरत है। वैश्विक राजनीति में भारत का वज़न निर्विवाद है। भारत एक महाशक्ति बनता जा रहा है।

मुझे पूरा विश्वास है कि रूसी-भारतीय संबंधों के विकास का वर्तमान ऐतिहासिक चरण इन संबंधों में एक नई गुणवत्ता लानेवाला और एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। रूस ने अपना मुँह पूर्व की ओर मोड़ा है और भारत में आधुनिकीकरण और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाने के लिए दृढ़-संकल्पित तथा एक बेहद व्यावहारिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक ही पार्टी की एक स्थिर सरकार में सत्ता में आई है। ये ऐसे शक्तिशाली कारक हैं जो भारत और रूस के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुँचा सकते हैं और हमारी रणनीतिक साझेदारी को एक नई गुणवत्ता प्रदान कर सकते हैं।

नतालिया बेन्यूख़ः आपको द्विपक्षीय रूसी-भारतीय संबंधों के जुड़े कई मुद्दों पर लगातार अपना ध्यान देना पड़ता है। इसके अलावा आप अंतर्राष्ट्रीय रेरिख मेमोरियल ट्रस्ट के उपाध्यक्ष और न्यासी बोर्ड के आजीवन सदस्य भी हैं। कई मायनों में आपके प्रयासों की बदौलत ही यह ट्रस्ट सक्रिय रूप से काम कर रहा है और रेरिख़ परिवार की विरासत को बढ़ावा देते हुए अपने अधिकारों की रक्षा कर रहा है। आपने अभी हाल ही में निकोलाई रेरिख़ की 140-वीं जयंती और स्वेतोस्लाव रेरिख़ की 110-वीं जयंती के अवसर पर कुल्लू में आयोजित भव्य समारोहों में भाग लिया था। क्या अंतर्राष्ट्रीय रेरिख मेमोरियल ट्रस्ट की वे कठिनाइयां दूर हो गई हैं जिनका भारत में रेरिख़ परिवार की विरासत का संरक्षण करते समय उसे सामना करना पड़ा था?

अलेक्सांदर कदाकिनः मेरी राय में अंतर्राष्ट्रीय रेरिख मेमोरियल ट्रस्ट कुछ अंदरूनी मतभेदों पर काबू पाते हुए अब दूतावास के नेतृत्व में विश्वासपूर्वक और रचनात्मक विकास के रास्ते पर चढ़ता जा रहा है। हमारी बड़ी-बड़ी योजनाएँ हैं। मैंने इन योजनाओं पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और रेरिख मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष, मेरे पुराने दोस्त वीरभद्र सिंह के साथ चर्चा की थी। हाल के भव्य समारोहों के दौरान ट्रस्ट के वर्तमान निदेशक और कुल्लू के ज़िला प्रशासक, राकेश कंवर के साथ हमारी बहुत सकारात्मक बातचीत हुई थी। हमें विश्वास है कि हम उन सभी परियोजनाओं को अमलीजामा पहना सकेंगे जिनका उद्देश्य हमारे महान हमवतनों की विरासत का संरक्षण करना और इसे और बढ़ाना है। रूसी पक्ष हमेशा इस बात की वकालत करेगा कि पश्चिमी हिमालय में स्थित रेरिख़ परिवार की इस संरक्षित संपत्ति का किसी भी हालत में व्यापारिकरण नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे संस्कृति, अध्यात्म, विज्ञान और शिक्षा के एक आकर्षक केंद्र में बदल दिया जाएगा जो निर्माण के लिए लोगों को एकजुट करेगा। रेरिख़ विरासत का संबंध वास्तव में नग्गर, कुल्लू घाटी, हिमाचल प्रदेश, या यहां तक कि रूस या भारत से ही नहीं है। इस विरासत का पूरी दुनिया के लिए सांस्कृतिक महत्त्व है। इसलिए, हम अपने भारतीय मित्रों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे कि अंतर्राष्ट्रीय रेरिख मेमोरियल ट्रस्ट सभी मामलों में उच्चतम अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बना रहेगा।

नतालिया बेन्यूख़ः आजकल भारत में रूसी राजदूत के कौन-से कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही?

अलेक्सांदर कदाकिनः मैं इनमें से केवल कुछ मुख्य कार्यों की चर्चा करूँगा। दिसम्बर में हम भारत के एक पुराने दोस्त- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन की भारत यात्रा की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ज़ाहिर है कि हमारा ध्यान भारत में नई सरकार के गठन के बाद होने जा रहे और मील का एक पत्थर बनने जा रहे पहले रूसी-भारतीय शिखर सम्मेलन की तैयारी से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित होगा। अंतर-सरकारी आयोगों और कार्यदलों की बैठकों की भी तैयारी की जा रही है। कुछ अन्य कार्य भी दरपेश हैं। नवंबर और दिसंबर में भारत में रूसी-संस्कृति का महोत्सव मनाया जाएगा। हमारा दूतावास इस बात की पूरी-पूरी कोशिश कर रहा है कि हमारे देश की कला का भारत में उज्ज्वल व गरिमामय प्रदर्शन किया जाएगा।

मुझे मैत्री पदक से सम्मानित करने की बधाई देने और रूसी-भारतीय संबंधों के विषय पर निरंतर ध्यान देने के लिए मैं "रेडियो रूस" का आभारी हूँ। हम पहले की तरह आगे भी एकसाथ मिलकर काम करते रहेंगे। रूसी-भारतीय मैत्री को समृद्ध बनाने के नेक काम में हम "रेडियो रूस" के साथ हैं, हम एक दूसरे के सहयोगी हैं।

नतालिया बेन्यूख़ः आपको मैत्री पदक से सम्मानित किए जाने की बधाई देने के साथ-साथ हम रूसी-भारतीय संबंधों को और मज़बूत बनाने के उद्देश्य से आपके द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों में बड़ी-बड़ी सफलताओं की हार्दिक कामना भी करते हैं।

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