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रेरिख़ की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए उच्च स्तर पर सहयोग ज़रूरी : राजदूत कदाकिन

Wednesday, 06 November 2013 07:24

रेडियो रूस को अन्तर्वार्ता देते हुए भारत मे रूस के राजदूत अलेक्सान्दर कदाकिन ने कहा कि रेरिख़ की विरासत को सुरक्षित रखने के क्षेत्र में रूस और भारत अपना पारस्परिक सहयोग काफ़ी हद तक बढ़ाने के लिए कटिबद्ध हैं।

यह बेहद ज़रूरी है और दोनों देश इस दिशा में मिलकर सक्रिय रूप से काम करना चाहते हैं। इस समझ की बदौलत ही सन् 2014 में आने वाली दो जयन्तियों की तैयारियाँ बड़े ज़ोर-शोर से की जा रही हैं। ये जयन्तियाँ हैं - निकलाय रेरिख़ की 140 वीं जयन्ती और स्वितास्लाव रेरिख़ की 110 वीं जयन्ती।

भारत में रूस के राजदूत अलेक्सान्दर कदाकिन ने कहा - हमने यह उद्देश्य अपने सामने रखा है कि हम अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों और गोष्ठियों का आयोजन करके ये जयन्तियाँ मनाएँगे और विश्व सभ्यता में हमारे ये हमवतन जो महत्त्वपूर्ण और उल्लेखनीय स्थान रखते हैं, हम उनकी व्यापक चर्चा करेंगे।

अलेक्सान्दर कदाकिन ने बताया कि विगत 21 अक्तूबर को मास्को के क्रेमलिन में दो देशों के नेताओं की मुलाकात के दौरान भी रेरिख़ की विरासत को सुरक्षित रखने और उसका विकास करने के सवाल की ओर बड़ा ध्यान दिया गया। व्लदीमिर पूतिन और डॉ० मनमोहन सिंह के बीच हुई वार्ता के दौरान रूस के विदेशमन्त्री सेर्गेय लवरोफ़ ने इस दिशा में मिलकर किए जाने वाले कामों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि पश्चिमी हिमालय में बसे हिमाचल प्रदेश राज्य के नग्गर नामक स्थान पर जो रेरिख़ संग्रहालय बना हुआ है, वह विदेश में रूसी रुहानी, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत का एक अनूठा स्मारक है और हमारे दो देशों के बीच साँस्कृतिक क्षेत्र में पारस्परिक गतिविधियों का एक प्रमुख स्थल है। हर साल हज़ारों रूसी और भारतीय लोग रेरिख़ परिवार को श्रद्धांजलि देने के लिए और उनकी विरासत का परिचय पाने के लिए यहाँ आते हैं।

रूस चाहता है कि इस दिशा में अन्तर्राजकीय स्तर पर सहयोग किया जाना चाहिए। यह सहयोग अन्तरसरकारी आयोग के सांस्कृतिक सहयोग सम्बन्धी कामकाजी दल के आधार पर मन्त्रालयों के स्तर पर किया जाना चाहिए तथा इस सहयोग के संयोजन का काम नई दिल्ली स्थित रूस के राजदूत और मास्को स्थित भारत के राजदूत को देखना चाहिए।

भारत ने भी रूस के इस नज़रिए से अपनी सहमति व्यक्त की। शिखर भेंट से पहले पत्रकारों से बात करते हुए और फिर शिखर भेंट के दौरान क्रेमलिन में डॉ० मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत में स्थित रेरिख़ परिवार की विरासत दोनों देशों की सँयुक्त मूल्यवान उपलब्धि है। भारत के प्रधानमन्त्री ने कहा - हम आगे भी उसकी सुरक्षा और विकास के लिए सभी ज़रूरी क़दम उठाते रहेंगे।

नग्गर में स्थित अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ स्मृति ट्रस्ट के एक संस्थापक और उपाध्यक्ष के रूप में अलेक्सान्दर कदाकिन का कहना है कि भावी उद्देश्यों को प्रभावशाली ढंग से पूरा करने के लिए यह ज़रूरी है कि इस ट्रस्ट की कार्यवाही में रूस और भारत के विभिन्न मंत्रालय तथा अन्य सरकारी विभाग भी सक्रिय रूप से भाग लें। हमें अपने इस सँयुक्त काम को इतने ऊँचे स्तर पर करना चाहिए कि वह स्थानीय प्रशासन के ब्यूरोक्रेसी भरे रवैये में ही फँसकर न रह जाए तथा वास्तव में ऊँचा अन्तरराष्ट्रीय स्तर प्राप्त करे। अलेक्सान्दर कदाकिन ने कहा - नग्गर में रेरिख़ परिवार के स्मृति संग्रहालय परिसर को विश्व स्तर का सांस्कृतिक, रुहानी, वैज्ञानिक और शैक्षिक केन्द्र बनाया जाना चाहिए।

The Voice of Russia

November 2, 2013

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