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ऑयल या गैस इंजीनियर बनने के लिए रूस में पढ़ाई कीजिए

Thursday, 16 May 2013 13:57

नई दिल्ली में फ़िरोजशाह मार्ग पर स्थित रूसी सांस्कृतिक केन्द्र में इन दिनों एक अनूठी प्रदर्शनी चल रही है। इस प्रदर्शनी का नाम है – रूस में शिक्षा-2013 ।

प्रदर्शनी में रूस के दस विश्व-विद्यालय भाग ले रहे हैं। रूस में पढ़ने के इच्छुक भारतीय किशोर-किशोरियाँ और युवक-युवतियाँ बड़ी संख्या में यह प्रदर्शनी देखने के लिए आ रहे हैं। रूस के अन्तरराष्ट्रीय शिक्षा केन्द्र की प्रमुख येलेना बर्मन ने रेडियो रूस की संवाददाता नताल्या बेन्यूख़ को बताया -- इस तरह की प्रदर्शनी का आयोजन सन् 1992 से हम हर साल करते आ रहे हैं। इस साल इतनी बड़ी संख्या में युवक-युवतियाँ और उनके माता-पिता इस प्रदर्शनी को देखने आ रहे हैं कि हम लोग दंग रह गए हैं। हमारी प्रदर्शनी में हर साल रूस के जो विश्वविद्यालय भाग लेते थे, इस बार उनके अलावा कुछ दूसरे रूसी शिक्षा-संस्थान भी प्रदर्शनी में आए हुए हैं। इनमें मास्को का राजकीय गूबकिन तेल व गैस विश्वविद्यालय भी शामिल है।

दिल्ली स्थित इस शैक्षिक प्रदर्शनी में रूस के राजकीय गूबकिन तेल व गैस विश्वविद्यालय की प्रतिनिधि गलीना त्रेत्याकवा ने बड़े गर्व से रेडियो रूस को बताया कि भारत में उनके विश्वविद्यालय से लोग ख़ूब अच्छी तरह परिचित हैं। सोवियत सत्ता काल में जिन लोगों ने भी गूबकिन तेल व गैस विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की थी, वे सभी आज अपने-अपने क्षेत्र में बड़ी सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। गलीना त्रेत्याकवा ने बताया :

इस प्रदर्शनी में हमारी यूनिवर्सिटी पहली बार भाग ले रही है। हमारे स्टॉल पर लोगों की भीड़ लगी हुई है। भारतीय युवक-युवतियाँ और उनके माता-पिता हमारे विश्वविद्यालय की फ़ैकल्टियों के बारे में हमसे ख़ूब पूछताछ कर रहे हैं और हमारे फार्म ले जा रहे हैं। यह प्रदर्शनी शुरू होने से पहले हम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को देखने गए थे। वहाँ हमने जे० एन० यू० के अधिकारियों और शिक्षाविदों से भी मुलाक़ात की। यूनिवर्सिटी के उपकुलपति मिस्टर अम्बेडकर से भी हमारी बातचीत हुई। फिर प्रदर्शनी के दौरान जे० एन० यू० और भारत की कुछ दूसरी यूनिवर्सिटियों की तरफ़ से हमें आपस में सहयोग करने के कुछ प्रस्ताव भी मिले हैं। हम इन यूनिवर्सिटियों के छात्रों के लिए यानी भावी इंजीनियरों, मैकेनिकों, कम्प्यूटर विशेषज्ञों आदि के लिए मास्को में कुछ विशेष प्रशिक्षण कोर्सों का आयोजन कर सकते हैं या भारतीय छात्रों को एम० ए० का कोर्स करने के लिए मास्को बुला सकते हैं। अब इस प्रदर्शनी में सफलतापूर्वक भाग लेने के बाद हमें आशा है कि अगले सितम्बर में शुरू होने वाले सत्र में कुछ भारतीय छात्र हमारे विश्वविद्यालय में भी पढ़ने के लिए पहुँचेंगे।

नई दिल्ली में फ़िरोजशाह मार्ग पर स्थित रूसी सांस्कृतिक केन्द्र में चल रही इस शिक्षा-प्रदर्शनी में हमारी मुलाक़ात तेइस वर्षीय युवक शुभम् शर्मा से हुई। शुभम् ने भी मास्को के गूबकिन विश्वविद्यालय में आगे उच्च-शिक्षा पाने के लिए अपना फ़ार्म भरा है। उन्हें आशा है कि इस साल उनका दाख़िला इस यूनिवर्सिटी में ज़रूर हो जाएगा। शुभम् शर्मा ने रेडियो रूस को बताया :

भारत में हम सब लोग अच्छी तरह से यह जानते हैं कि रूस में इंजिनियरिंग की बड़ी अच्छी पढ़ाई होती है। इसीलिए मेरी इच्छा है कि मेरा दाखिला मास्को की गूबकिन यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग फ़ैकल्टी में हो जाए। इससे पहले मैं लखनऊ के पोलिटेक्निकल इंस्टीट्यूट में पढ़ता था और मैंने वहाँ पढ़ाई ख़त्म कर ली है। मेरा ख़याल है कि भारत और रूस में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ऑयल-इंजीनियर बनने का मेरा सपना पूरा हो जाएगा।

लेकिन दोस्तो, सच बात तो यह है कि रूस आने वाले ज़्यादातर भारतीय छात्र यहाँ मेडिकल की पढ़ाई करते हैं। आँकड़े इसके गवाह हैं। इनमें सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है, मास्को से 170 किलोमीटर दूर स्थित त्वेर नगर की मेडिकल-एकेडमी। इस मेडिकल एकेडमी में इस समय 800 भारतीय छात्र शिक्षा पा रहे हैं। इसके बाद वोल्गाग्राद मेडिकल यूनिवर्सिटी और कज़ान मेडिकल एकेडमी का नम्बर आता है, जहाँ साल-दर-साल भारतीय छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दिल्ली में रूसी सांस्कृतिक केन्द्र में चल रही शिक्षा-प्रदर्शनी में भाग ले रहे कज़ान मेडिकल एकेडमी के प्रतिनिधि मरात अहमेतफ़ ने बताया -- इसका कारण यह है कि रूसी शिक्षा संस्थानों में फ़ीस बहुत कम है और वहाँ विदेशी छात्रों को लगभग हर तरह की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। सारी पढ़ाई भी अँग्रेज़ी भाषा में होती है। मरात अहमेतफ़ ने कहा :

इस प्रदर्शनी के दौरान बहुत से छात्र हमारे स्टॉल पर आए और हमसे यह पूछताछ करते रहे कि हमारी मेडिकल एकेडमी में दाखिला लेने के लिए उन्हें क्या करना होगा? दाख़िला कब तक कन्फ़र्म हो जाएगा? हमारे यहाँ पढ़ाई कैसे होती है? आदि-आदि। हमने उन्हें बताया कि आज भी हमारी एकेडमी में साढ़े तीन सौ भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं। मेडिकल की शिक्षा छह साल की है। उसके बाद दो वर्ष तक व्यावहारिक प्रशिक्षण पाना होगा। पिछले साल ही हमारी एकेडमी से 120 भारतीय छात्र पढ़कर निकले हैं। इन लोगों ने भारत पहुँचकर सभी परीक्षाएँ अच्छी तरह से पास कर लीं और सभी ने भारत में अपनी-अपनी प्रेक्टिस शुरू कर दी है।

रूस के अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा केन्द्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस में विदेशी छात्रों को अँग्रेज़ी में शिक्षा दी जाने लगे तो उनकी संख्या कई गुना बढ़ जाएगी, क्योंकि रूस में शिक्षा बहुत सस्ती है और भारत तथा दूसरे देशों के मुकाबले बहुत कम फ़ीस देनी पड़ती है। यहाँ शिक्षा का स्तर भी बहुत ऊँचा है। छात्रों को रहने-खाने की भी हर तरह की सुविधा उपलब्ध है। रूस के बहुत से शिक्षा-संस्थान अब अँग्रेज़ी भाषा में शिक्षा देना शुरू करने जा रहे हैं। अभी तक तो बस, कुछ मेडिकल इंस्टीट्यूट ही ऐसे हैं, जो अँग्रेज़ी में शिक्षा दे रहे हैं। लेकिन टेक्नीकल इंस्टीट्यूटों में छात्रों को एक वर्ष के भीतर इतनी रूसी भाषा सिखा दी जाती है कि वे अपनी पढ़ाई रूसी भाषा में कर सकते हैं।

दिल्ली के बाद रूसी विश्वविद्यालयों में शिक्षा के बारे में इस प्रदर्शनी का आयोजन कोलकाता, चेन्नै और मुम्बई में भी किया जाएगा।

16.05.2013

The Voice of Russia

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