BRICS

ब्रिक्स के भावी डर्बन शिखर-सम्मेलन में क्या होगा?

Friday, 22 March 2013 07:07

मास्को ब्रिक्स को सिर्फ़ बातचीत का मंच नही समझता बल्कि वह उसे प्रमुख भूमंडलीय समस्याओं पर आपसी नीतियों में सामंजस्य बनाने वाली एक संस्था मानता है। रूस के लिए ब्रिक्स के अन्तर्गत सहयोग उसकी विदेशनीति की एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक दिशा है। हमारा यह नज़रिया उस अवधारणा में भी अभिव्यक्त हुआ है, जिसकी रूस के राष्ट्रपति ने पुष्टि की है।

इस अवधारणा में ब्रिक्स-दल के अन्तर्गत रूस के रणनीतिक उद्देश्य तय किए गए हैं। ब्रिक्स दल कोई सैन्य-गुट नहीं है और इस मंच पर सैन्य क्षेत्र में सहयोग करने का कोई इरादा भी नहीं है। यह मंच तो आर्थिक सहयोग के लिए है। रूस के उपविदेशमंत्री सेर्गेय रिब्कोफ़ ने कहा -- लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इस दल में शामिल देश आपस में राजनीतिक सहयोग नहीं करेंगे। सेर्गेय रिब्कोफ़ ने कहा :

हम दूसरे देशों की सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखण्डता का सम्मान करते हुए, उनके घरेलू मामलों में बिना कोई हस्तक्षेप किए अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों के सम्मान के आधार पर सुरक्षा को मज़बूत बनाने के लिए अपने इस मंच के अन्तर्गत अपने राजनीतिक और वैदेशिक सहयोग को लगातार व्यापक करते चले जाएँगे। ब्रिक्स-दल में शामिल होकर रूस की बहुमुखी विदेशनीति और ज़्यादा मज़बूत बनती है।

सेर्गेय रिब्कोफ़ ने ज़ोर दिया कि रूस ब्रिक्स-दल के अपने सहयोगियों के साथ विशेषाधिकार प्राप्त दुपक्षीय सम्बन्धों का विकास करना चाहता है। हमारा मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स के सदस्यों के साथ गुणात्मक स्तर पर नई तरह का सहयोग करना है। इससे हमारा यह मंच भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त करेगा और अधिक स्थिर बनेगा। इस तरह ब्रिक्स के देशों को वित्तीय-आर्थिक क्षेत्र में दुनिया को प्रभावित करने की संभावना मिलेगी। इससे अन्तर्राष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय व्यवस्था को भी अधिक न्यायसंगत, स्थिर और अधिक प्रभावशाली बनाना संभव होगा।

सेर्गेय रिब्कोफ़ ने कहा कि दक्षिणी अफ़्रीका के डर्बन शहर में होने जा रहे ब्रिक्स के आगामी शिखर-सम्मेलन में विकास बैंक की स्थापना की ब्रिक्स-दल द्वारा पेश की गई पहल पर कोई ठोस निर्णय भी लिया जा सकता है। सेर्गेय रिब्कोफ़ ने कहा :

जहाँ तक ब्रिक्स के अपने विकास बैंक की बात है तो हम इस सिलसिले में आधिकारिक निर्णय लेने के क़रीब पहुँच चुके हैं। अभी मैं आपको उन सब सवालों के बारे में विस्तार से नहीं बता सकता हूँ, जो डर्बन शिखर-सम्मेलन में विचार करने के लिए तैयार किए गए हैं। सब-कुछ नेताओं के निर्णय पर ही निर्भर करेगा। विशेषज्ञों ने इस पर काम पूरा कर लिया है, अब नेताओं की बारी है। उन्हें ही विचार करके निर्णय लेना है कि इस सिलसिले में क्या करना है।

डर्बन में जो दूसरे सवाल तय किए जाएँगे, उनमें राष्ट्रीय मुद्राओं में आपसी भुगतान शुरू करने का सवाल भी है। रूस हमेशा से ही इसके पक्ष में रहा है कि विश्व अर्थव्यवस्था में उन मुद्राओं की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, जिनमें आपसी कार्य-व्यापार हो सकता है। इससे विश्व-अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ होगा। मुद्रा-बाज़ार में मुद्राओं के मूल्य ऊपर-नीचे होने और उनमें भारी बदलाव आने से जो नुक़सान उठाना पड़ता है, तब उससे बचना भी संभव हो जाएगा। सेर्गेय रिब्कोफ़ ने बताया कि ब्रिक्स के डर्बन शिखर सम्मेलन में लम्बे समय से चर्चा का विषय रहे -- सँयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद में किए जाने वाले भावी सुधार पर भी बातचीत की जाएगी। सेर्गेय रिब्कोफ़ ने कहा :

दूसरे सवालों की तरह इस सवाल पर भी रूस रचनात्मक और सन्तुलित भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हम उस हर निर्णय से सहमत होंगे, जिसे सँयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के दो-तिहाई सदस्य अपना समर्थन देंगे। हमें ऐसा कोई काम नहीं करना है, जिससे सँयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रभाव और प्रतिष्ठा पर असर पड़े।

 

सेर्गेय रिब्कोफ़ ने बताया कि आगामी 26-27 मार्च को दक्षिणी अफ़्रीका में, डर्बन में होने वाला ब्रिक्स का शिखर-सम्मेलन एक बहुत व्यस्त और महत्त्वपूर्ण सम्मेलन होगा। डर्बन में होने जा रहे इस शिखर-सम्मेलन के दौरान ही अफ़्रीकी देशों के नेताओं और कुछ क्षेत्रीय संगठनों के सदस्य देशों के नेताओं की एक बैठक भी आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी भी भाग लेंगे, जिन्होंने पिछले सप्ताह ही यह घोषणा की है कि मिस्र भी ब्रिक्स दल में शामिल होने की इच्छा रखता है।

21.03.2013

रेडियो रूस ( Redio Rus).

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