G20_Putin

हर सवाल पर रूस और चीन का नज़रिया सन्तुलित : पूतिन

Friday, 22 March 2013 05:37

चीन के राष्ट्रपति शी जिन-पिंग की रूस यात्रा की पूर्ववेला में रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने रूसी समाचार-समिति 'इतार-तास' को अन्तर्वार्ता दी। अपने इस इन्टरव्यू में पूतिन ने बताया है कि वे दो देशों के बीच आपसी सम्बन्धों के विकास के बारे में क्या सोचते हैं और इन सम्बन्धों का दुनिया की परिस्थिति पर क्या असर पड़ेगा। इसके साथ-साथ व्लदीमिर पूतिन ने बड़ी तेज़ी से विकास कर रहे दुनिया के पाँच देशों के दल ब्रिक्स-मंच की भी चर्चा की है। हम अपने पाठकों के लिए व्लदीमिर पूतिन के उस इन्टरव्यू के कुछ महत्त्वपूर्ण अंश प्रस्तुत कर रहे हैं।

फ़ोटो: रिया नोवोस्ती

प्रश्न : ब्रिक्स देशों के दल नेअपने विकास कीसकारात्मकभविष्यवाणियों की वज़ह से सारी दुनिया काध्यानआकर्षित कियाहै।ख़ासकरवैश्विक अर्थव्यवस्था में चल रहे गम्भीरआर्थिक संकट के परिप्रेक्ष्य मेंब्रिक्स-दल के देशों का यह विकास सचमुचआश्चर्यजनक लगता है। आपकी नज़र में आजब्रिक्स काका क्या महत्त्व हैऔरभविष्य में वह कितना महत्त्वपूर्णहोगा?

उत्तर :कुछ ऐसे दीर्घकालीन तत्त्व हैं, जो ब्रिक्स की सफलता निश्चित करते हैं। ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका पिछले दो दशक से विश्व के आर्थिक विकास में अग्रणी बने हुए हैं। उसी समय ब्रिक्स-दल के सदस्य देशों का सकल घरेलू उत्पाद उनकी राष्ट्रीय मुद्राओं की क्रय-क्षमता को देखते हुए आजकल विश्व के कुल सकल उत्पाद के 27 प्रतिशत हिस्से से भी ज़्यादा है और उनका यह अंशदान लगातार बढ़ता जा रहा है।

ब्रिक्स -- आजकल बन रही बहुमुखी दुनिया के प्रमुख तत्त्वों में से एक है। ब्रिक्स के देश ताक़त का इस्तेमाल करके दबाव डालने और दूसरे देशों की संप्रभुता को चोट पहुँचाने की नीति नहीं अपनाते। सीरियाई संकट, ईरान से जुड़े सवालों और पश्चिमी एशिया की स्थिति सहित सभी सामयिक अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं पर हमारे नज़रिए काफ़ी हद तक एक-समान हैं।

ब्रिक्स-दल के सदस्य देश विश्व की अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित सवालों पर अधिक सन्तुलित रवैया अपनाने और न्यायसम्मत प्रणाली बनाने के हामी हैं। आर्थिक रूप से विकासशील देश चाहते हैं कि विश्व की अर्थव्यवस्था का स्थिर और दीर्घकालीन विकास हो तथा उसके आर्थिक और वित्तीय ढाँचे में सुधार किया जाए ताकि वह और ज़्यादा प्रभावशाली ढंग से काम करे। पिछले साल अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की ऋण-क्षमता में 75 अरब डॉलर का योगदान करने का एकमत से लिया गया निर्णय इसका सबूत है, जिसकी वज़ह से तेज़ी से विकास कर रहे देशों को अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की मूल पूंजी में अपनी सहभागिता बढ़ाने की सम्भावना मिली।

प्रश्न : निकट भविष्य में ब्रिक्स क्या-क्या काम करने जा रहा है औरक्या ब्रिक्स-दल के देशों के आर्थिक-विकास की कोई रणनीति भी बनाई गईहै?

उत्तर : हमें उम्मीद है कि जी-20 के सेंट-पीटर्सबर्ग में होने जा रहे भावी शिखर-सम्मेलन में उठने वाले सवालों पर अपने नज़रियों को हम और निकट ला सकेंगे तथा मादक-पदार्थों के ग़ैरकानूनी उत्पादन और उनकी तस्करी को रोकने, आतंकवाद के ख़तरे को कम करने, साइबर-क्षेत्र में किए जाने वाले अपराधों और सैन्य अपराधों को रोकने के काम में आपसी सहयोग बढ़ाएँगे।

रूस ब्रिक्स-दल के अपने सहयोगी देशों के साथ व्यापारिक और पारस्परिक निवेश गतिविधियों को बड़ा महत्त्व देता है। वह उनके साथ मिलकर ऐसी नई बहुमुखी व्यावसायिक परियोजनाएँ शुरू करना चाहता है, जिनमें हमारे देशों के व्यवसायिक क्षेत्र भी सक्रिय रूप से भाग ले सकें। ब्रिक्स-दल की कामकाजी परिषद इस काम में बड़ा योग देगी। ब्रिक्स के डर्बन शिखर सम्मेलन में हम इस परिषद के गठन की आधिकारिक तौर पर घोषणा करेंगे।

डर्बन शिखर सम्मेलन की पूर्ववेला में ब्रिक्स देशों के व्यवसायिकों का भी एक सम्मेलन होगा, जिसमें हमारे पाँच देशों के 900 से अधिक व्यवसायी भाग लेंगे।

प्रश्न : ब्रिक्स-दल के देश इतने ज़्यादा सक्षम हैं कि वे नसिर्फ़आर्थिकस्तर पर सहयोग कर सकते हैं बल्किभूमण्डलीय राजनीति केस्तर परभी आपसमे गहरा सहयोग कर सकते हैं।आज की दुनिया में ब्रिक्स देशों कीराजनीतिकभूमिकाक्या है, उनका राजनीतिक मिशन क्या है?

उत्तर : ब्रिक्स-दल के देश यह कोशिश कर रहे हैं कि सबसे पहले तो विश्व की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जाए, उसे इतना स्थिर बनाया जाए कि वह ख़ुद विकास करती रहे। हम अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय-आर्थिक ढाँचे में भी सुधार करना चाहते हैं।

इसके साथ-साथ हमने अपने सहयोगियों से कहा है कि इसे कामकाजी मंच के साथ-साथ एक ऐसे मंच में भी बदला जाए जो कुछ दूसरे सवालों पर भी हमारी नीतियों के बीच, हमारे नज़रियों के बीच समन्वय का काम करे तथा रणनीतिक रूप से पारस्परिक सहयोग की एक सम्पूर्ण व्यवस्था बन जाए।

डर्बन शिखर सम्मेलन के लिए हम एक ऐसा सँयुक्त घोषणापत्र तैयार कर रहे हैं, जिसमें सीरियाई संकट, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान तथा पश्चिमी एशिया की समस्या जैसे समसामयिक अन्तर्राष्ट्रीय सवालों पर हम विस्तार से अपना सैद्धान्तिक नज़रिया स्पष्ट कर देंगे।

हम ब्रिक्स को पश्चिमी देशों या उनके संगठनों के विरुद्ध खड़े किसी भूराजनीतिक प्रतिस्पर्धी की भूमिका में नहीं देखते। इसके विपरीत हम तो आम बहुमुखी दुनिया का निर्माण करने के लिए उन सभी के साथ खुली बातचीत करने के लिए तैयार हैं, जो हमसे बात करना चाहता है।

प्रश्न : रूस और चीन ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी हैं। न सिर्फ़ इन दो देशों के विकास बल्कि आधुनिक विश्व व्यवस्था और विश्व अर्थव्यवस्था के विकास की दृष्टि से इस सहयोग का आपकी नज़र में क्या महत्त्व है?

उत्तर : रूस और चीन विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं। ये दोनों देश सँयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य हैं और अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के भी प्रभावशाली सदस्य हैं। इसलिए हमारे दो देशों के बीच हो रहा रणनीतिक सहयोग न सिर्फ़ हमारे देशों के लिए बल्कि भूमंडलीय स्तर पर भी बड़ा महत्त्व रखता है।

आज रूसी चीनी सम्बन्ध अपने विकास के उस दौर में हैं, जिसे उनके सदियों पुराने इतिहास का सबसे बेहतर दौर कहा जा सकता है। दोनों देश एक-दूसरे पर गहरा विश्वास करते हैं, दोनों एक-दूसरे के हितो का पूरा-पूरा ध्यान रखते हैं, सभी महत्त्वपूर्ण सवालों पर एक-दूसरे को समर्थन और सहायता देते हैं। दोनों देशों के बीच सचमुच व्यापक सहयोग हो रहा है और दोनों के बीच बहुमुखी सहयोगी का रिश्ता है।

रूस के राष्ट्रपति शी जिन-पिंग इन दिनों रूस की राजकीय यात्रा पर आए हुए हैं। चीन के नए नेता ने अपनी पहली विदेश-यात्रा करने के लिए हमारे देश को चुना, यह बात यह सिद्ध करती है कि रूस और चीन के बीच विशेष रणनीतिक सहयोग होता है।

प्रमुख अन्तरराष्ट्रीय समस्याओं पर और विश्व व्यवस्था से जुड़े मुख्य सवालों पर हमारे नज़रियों में दिखाई देने वाली एकरूपता विश्व राजनीति को स्थिरता प्रदान करने वाला एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। रूस और चीन पश्चिमी एशिया और उत्तरी अफ़्रीका की परिस्थिति, कोरियाई प्रायद्वीप की परमाणु समस्या तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से सम्बन्धित समस्या जैसे तीखे और ज्वलन्त सवालों पर व्यावहारिक और सन्तुलित नज़रिया रखते हैं और दूसरों के लिए भी एक उदाहरण पेश करते हैं।

22.03.2013

रेडियो रूस ( Redio Rus).

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