भारत-रूस आर्थिक संबंध मजबूत होंगे

Wednesday, 28 October 2015 08:45

भारत और रूस पारस्परिक व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए रूपया-रूबल प्रणाली अपनाने पर सहमत। दो देश कृषि, औषध-निर्माण, बुनियादी ढांचा जैसे कुछ नए क्षेत्रों में सहयोग करेंगे। पिछले हफ्ते भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मास्को की तीन दिवसीय यात्रा की। विदेश मंत्री के रूप में यह रूस की उनकी पहली यात्रा थी और इसका उद्देश्य रूस के विदेशमंत्री सिर्गेय लवरोफ और रूस के उपप्रधानमंत्री दमित्री रगोजिन के साथ भारत-रूस अंतर्सरकारी सहयोग संबंधी आयोग की 21वीं वार्षिक बैठक में भाग लेना था। बैठक में दोनों पक्षों के उच्च सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया। स्वराज और रगोजिन ने आयोग की बैठक के अंत में द्विपक्षीय वार्ता के परिणामों के बारे में एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। दोनों पक्षों ने रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त ‘द्रुज़्बा-दोस्ती’ लक्ष्य पर अमल करने हेतु एक रणनीति तैयार करने का फैसला किया है। अगले दशक में इस रणनीति के तहत द्विपक्षीय व्यापारिक व आर्थिक सहयोग के इस लक्ष्य को अमली जामा पहनाया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच ‘विशिष्ट रणनीतिक भागीदारी’ को अधिकाधिक मजबूत बनाना है। इस प्रोटोकॉल के महत्व का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि यह दस्तावेज ‘द्रुज़्बा-दोस्ती’ लक्ष्य के कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उल्लेखनीय है कि पुतिन और मोदी ने पिछले दिसंबर में नई दिल्ली में वार्षिक भारत-रूस शिखर-वार्ता के अंत में ‘द्रुज़्बा-दोस्ती’ संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए थे। इस वार्ता के दौरान दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पन्न समस्याओं पर विचार-विनिमय किया। आयोग की बैठक से पहले कई संयुक्त कार्यकारी समूहों ने सहयोग के विभिन्न मुद्दों पर अपनी रिपोर्टें तैयार कर ली थीं, जिससे समस्याओं पर निर्णय लेना आसान हो गया। बातचीत के दौरान, दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा सहित ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया। भारत और रूस के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के विकास को प्राथमिकता दी गई। स्मरणीय है कि भारत और रूस ने 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जबकि 2014 में दोनों देशों के बीच व्यापार 10 अरब डॉलर था। दोनों पक्षों ने इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कृषि, औषध-निर्माण, बुनियादी ढांचा जैसे कुछ क्षेत्रों की पहचान की है। इन क्षेत्रों में पारस्परिक सहयोग संबंधों को गति दी जाएगी। भारत और रूस पारस्परिक व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए रूपया-रूबल प्रणाली अपनाने पर पहले ही सहमत हो चुके हैं। इस विषय पर दोनों देशों ने एक संयुक्त कार्यकारी समूह का गठन भी किया है। बैठक में एक समय-सीमा के अंदर रूपया-रूबल प्रणाली पर समझौता करने की संभावनाओं पर प्रमुखता से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में रगोजिन ने कहा कि रूस परमाणु ऊर्जा, ताप बिजलीघरों, धातु और मशीन-निर्माण उद्योगों के विकास, खनिज-पदार्थों की खोज, गैस व विद्युतलाइनें बिछाने, रेलमार्ग, बुनियादी ढांचे स्थापित करने, विमान तथा हेलीकाप्टर निर्माण, अंतरिक्ष अनुसंधान, संचार के आधुनिक साधनों को विकसित करने व ‘चुस्त शहरों’ का निर्माण करने में भारत की सहायता करेगा। सुषमा स्वराज ने कहा कि रूस ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में हमेशा सहयोग किया है। उन्होंने जोर देकर कहा - रूस प्रत्येक भारतीय के दिल में एक खास स्थान रखता है। रूस के साथ हमारी अनोखी रणनीतिक भागीदारी समय की कसौटी पर खरी उतरी है। मुझे विश्वास है कि जैसे-जैसे हमारा सहयोग बढ़ेगा भारत और रूस के बीच यह विशेष बंधन मजबूत होता जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत यूरेशियाई आर्थिक समुदाय के साथ अपने सहयोग के विस्तार तथा रूस-नीत सीमाशुल्क संघ के देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते को काफी महत्व देता है, क्योंकि इससे रूस के साथ भारत के व्यापार और निवेश को बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्वराज ने आशा व्यक्त की कि इस पर एक समझौता शीघ्र ही होगा। स्वराज की यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य मोदी-पुतिन शिखर-वार्ता के एजेंडे को भी अंतिम रूप देना था। इस संबंध में उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लवरोफ से भी मुलाकात की। सुषमा स्वराज का स्वागत करते हुए लवरोफ ने आशा व्यक्त की कि उनकी इस यात्रा से दोनों देशों के बीच बहुआयामी मैत्रीपूर्ण संबंध और मजबूत होंगे। लवरोफ ने कहा - मास्को में आपसे मिलकर हम बहुत खुश हैं। रूस और भारत के बीच विशेषाधिकार-प्राप्त रणनीतिक भागीदारी हमारे राष्ट्रों की अनोखी उपलब्धि है। सुषमा स्वराज ने कहा कि रूस भारत का एक जांचा-परखा दोस्त है। यदि हम द्विपक्षीय संबंधों की बात करें तो रूस हमारा एक सच्चा मित्र है। दो देशों में दोस्ती का यह भाव न केवल सरकारी स्तर पर, बल्कि आम लोगों के स्तर पर भी दिखाई देता है। व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों के स्तर को और ऊंचा उठाने के प्रयासों को तेज करने के लिए दमित्री रगोजिन ने सुषमा स्वराज को अगले वर्ष रूस के येकातेरिनबुर्ग में होनेवाली अंतर्राष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी ‘इन्नोप्रोम 2016’ में भाग लेने के लिए निमंत्रित किया, जिसे उन्होंने साभार स्वीकार कर लिया।

 

http://hindi.rbth, 26.10.2015

Popular articles

24 July 2017

Foreign Minister Sergey Lavrov’s interview with «NBC», Moscow,...

Question: Minister, thank you very much for your time. There is a lot to talk about. There is Syria, there is North Korea, there is China, there is...
22 July 2017

His EXCELLENCY MR RAM NATH KOVIND, PRESIDENT ELECT...

Unofficial translationMoscow, Kremlin,July 20, 2017Esteemed Mr Kovind,Kindly accept my heartfelt congratulations on your election as the President.You are...
08 July 2017

BRICS Leaders’ Meeting

Before the start of the G20 Summit in Hamburg, an informal meeting took place between the heads of state and government of the BRICS countries (Brazil,...
Emergency phone number only for the citizens of Russia in emergency in India +91-81-3030-0551
Address:
Shantipath, Chanakyapuri,
New Delhi - 110021
Telephones:
(91-11) 2611-0640/41/42;
(91-11) 2687 38 02;
(91-11) 2687 37 99
E-mail:
This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.