निकलाय रोरिख की 140वीँ वर्षगांठ महोत्सव के अवसर पर भारत में रूस के राजदूत महामहिम अलेक्सान्दर एम. कदाकिन का उद्घाटन भाषण

Sunday, 05 October 2014 23:24

नग्गर, 4 अक्तूबर 2014

डॉ रकेश कनवार,

आदरणीय अतिथिगण,

प्रिय मित्रो!

                     

आज रोरिख समारोह में आपका हार्दिक स्वागत करते हुए हम बेहद खुश महसूस कर रहे हैं। इस साल हम एक ही नहीं बल्कि तीन वर्षगाँठ मना रहे हैं। सबसे पहले हम निकलाय रोरिख की 140वीँ वर्षगाँठ पर गर्व कर रहे हैं, जिन्होंने रूस के एक महान चित्रकार, दार्शनिक, वैज्ञानिक, यात्री होकर भारत को अपनी दूसरी मातृभूमि चुन लिया। उल्लेखनीय बात है कि पवित्र कुल्लू घाटी में निकलाय रोरिख को एक महाऋषि मानते हैं।

इस साल हम श्री निकलाय रोरिख के विख्यात पुत्र स्व्यातस्लाव रोरिख की 110वीँ वार्षिकी भी मना रहे हैं, जो प्रसिद्ध चित्रकार एवं अंतर्राष्ट्रीय रोरिख स्मारक ट्रस्ट के संस्थापक थे। इस के साथ ही श्री निकलाय रोरिख की धर्मपत्नी, दार्शनिक एवं लेखक श्रीमती येलेना रोरिख की 135वीँ जयंती मनाई जा रही है।

इससे बढ़कर एक और ध्यान देने वाली तिथि है। निकलाय रोरिख द्वारा रचे गए एक मशहूर अंतर्राष्ट्रीय मानविकीय दस्तावेज़ के अनुसार कार्य शुरु करने से करीब 80 साल हो चुके हैं। इस दस्तावेज़ का नाम है – रोरिख पैक्ट। रोरिख पैक्ट का मुख्य उद्देश्य यह है कि मानवता को प्राप्त सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, शैक्षणिक विरासत सुरक्षित रखा जाए। उनके द्वारा शान्ति का झंडा यानी पीस का बैनर भी बनाया गया जो दुनिया के स्मारकों की सुरक्षा का एक प्रतीक माना जाता है। आज यह झंडा कुल्लू घाटी यानी देवों की घाटी में स्थित रोरिख भवन के सामने रूसी और भारतीय तिरंगों के साथ-साथ लहक रहा है।

निकलाय रोरिख की पूरी ज़िन्दगी मानवता को सौन्दर्य का नया रूप दिखाने की एक कोशिश थी। इसी इलाके में रोरिख परिवार ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा बिताया। यही घाटी उनकी कर्म-भूमि और उनका निधन स्थान बनी।

निकलाय रोरिख ने लिखा – जहाँ संस्कृति बसा हुआ है, वहाँ शान्ति भी फैल जाती है। वहाँ बहुत सारी सामाजिक समस्याओं को हल करने में सफलता मिलती हैं। संस्कृति में सर्वोत्तम खुशी, सर्वोत्तम सौंदर्य एवं सर्वोत्तम ज्ञान मिलकर एक हो जाते हैं।उनके चित्र जिन में भारत के पवित्र भूमि के अमर अलंकार प्रतिबिंबित हुए, अमूल्य विरासत बन गए हैं।

हमारे लिए बड़ी खुशी की बात यह है कि आज हमारे बीच भारत, मनगोलीया और नेपाल में रहने वाले रूसी हमवतन, यानी रूसी देशबंधु इकट्ठे हुए हैं। हम बहुत प्रसन्न हैं कि इन्होंने सब मिलकर विदेश में रूसी विरासत की सुरक्षा के सवाल पर जानकारियों का आदान-प्रदान किया है। इसका मतलब हुआ कि रोरिख पैक्ट में चर्चित विचारों को फिर से अमली रूप दिया गया है।

बीस साल बाद यह देखकर कि स्व्यातस्लाव रोरिख द्वारा की गई यह पहल यानी रोरिख स्मारक ट्रस्ट की स्थापना इतनी सफलतापूर्वक निकल आई है, दिल आनंद से धड़क रहा है। रोरिख आर्टगेलरीसहित रोरिख संग्रहालय समूह हिमाचल प्रदेश की देखने योग्य जगहों की सूची में शामिल हो हया है। हिन्दुस्तानी तथा विदेशी यात्री लाखों में इसको देखने आते है। पर्यटकों की इस सक्रिय रुचि से स्व्यातस्लाव रोरिख का सपना पूरा हो गया। यह रुचि इस बात का प्रमाण भी देती है कि रूस और भारत के बीच विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक सहयोग एक नए स्तर पहुँच गया है।

कुछ समय पहले हिमाचल प्रदेश के मुख्य मंत्री डॉ. वीरभद्र सिंघ के साथ हमारी मुलाकात हुई, जो हमारे एक बहुत अच्छे दोस्त भी हैं। हम ने मिलकर निर्णय लिया है कि अंतर्राष्ट्रीय रोरिख स्मारक ट्रस्ट यानी अय.अर.एम.टी. के कार्य गतिविधियों में सक्रियता लाई जाए। सब से पहले हम मुख्य मंत्री जी के साथ इस बात पर सहमत हो गए हैं कि नग्गर स्थित अय.अर.एम.टी. का घर-संग्रहालय की मरम्मत जल्द से जल्द की जाए, और यह काम रूसी तथा भारतीय विशेषज्ञों द्वारा दिए गए तकनीकी अनुमानों के अनुसार ही कर दिया जाए।

एक और बात है जिसे हम बेहद महत्त्वपूर्ण समझते हैं। रोरिख आवास में जो कला अकादमी काम कर रही है, इसकी इमारत का निर्माण जारी किया जाए, तथा अकादमी

में नग्गर के आस-पास रहनेवाले बच्चों की जो प्रशिक्षण प्रक्रिया चल रही है  इसको पहले की तरह गतिशील बनाया जाए तथा हर तरह का समर्थन दिया जाए।

हमारी उम्मीद है कि भविष्य में रोरिख स्मारक ट्रस्ट अड़ोस-पड़ोस का एक छोटी-सी संग्रहालय नहीं बल्कि सारी दुनिया का एक पवित्र स्थान, संस्कृति का एक शानदार भंडार बन जाए। इस में न सिर्फ़ रूस के एक महान परिवार का इतिहास, लेकिन हिमाचल के निवासियों का सांस्कृतिक विरासत भी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाए। रूस रोरिख संग्रहालय समूह का आगे विकास करता रहेगा ताकि इसको वैश्विक तौर पर मान्यता दी जाए। हमारा पक्का विश्वास है कि यह पवित्र स्थान अमूल्य है। रोरिख परिवार का विरासत इतना महत्व रखता है कि वह न ही कुल्लू घाटी का या हिमाचल प्रदेश का, और न ही भला रूस, या भारत का है, लेकिन विश्व का होता है।

अंतर्राष्ट्रीय रोरिख स्मारक ट्रस्ट वैश्विक तौर पर शान्ति और सहयोग का एक प्रतीक है। कंधे से कंधा मिलाकर अध्ययन करके तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान करके देश तथा महादेश आपस में जुड़ जाते हैं। इसलिये हम हर कोशिश करेंगे ताकि अंतर्राष्ट्रीय रोरिख स्मारक ट्रस्ट को आगे बढ़ाने में रूस और भारत द्वारा किए जाने वाले प्रयास जारी रखे जाएँ।

मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना के पीछे मौजूद प्रेरणात्मक मिशन के अनुसार ट्रस्ट में काम करने वाले लोग हमख्याल तथा खुले दिल वाले होने चाहिए। हम सक्रिय रूप से पारस्परिक समझ, एकजुटता एवं सहयोग को लेकर आगे कार्य चलाएँगे।

प्रिय नग्गर वालो, पिछले साल भारत में रूसी राजदूतावास ने एक वचन दिया था कि अगली बार हम अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित करेंगे। तो लीजिए - इन दिनों हम साथ-साथ मिलकर रूसी लोक नृत्य, चित्र प्रदर्शनियाँ तथा अन्य शानदार अभिनय देख पाएँगे।

हम दोस्तोयानिए, यानी विरासत नाम की रूसी अंतर्देशीय सामूहिक संस्था का खास मूल्यांकन करना चाहेंगे तथा निजी तौर पर इसके प्रधान श्रीमती नताल्य पिववारवा का हमारा हार्दिक स्वागत है। नताल्या जी हर वर्ष रूसी प्रदेशों में रहनेवाले सबसे प्रतिभाशाली बच्चों को लेकर आपके सामने उपस्थित होती हैं। इस के लिए उनको बहुत-बहुत धन्यवाद।

यह बड़ी खुशी की बात है कि हमारा रचनात्मक महोत्सव कुल्लू घाटी में धूमधाम से मनाए जाने वाले दशहरा के त्योहार के दिनों हो रहा है।

भाइयो और बहनो,प्रिया दोस्तो!दशहरा के अवसर पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ! आपके सभी घरवाले व रिश्तेदार हमेशा स्वस्थ्य रहे!

रूसी-भारतीय दोस्ती आगे बढे!

जय रूस, जय हिन्द!

     धन्यवाद!

Popular articles

29 November 2016

Press release of the Russian Embassy in India,...

STATEMENT OF THE MINISTRY OF FOREIGN AFFAIRS OF RUSSIA IN CONNECTION WITH REPORTS IN PAKISTAN’S MEDIA ABOUT THE RUSSIAN FEDERATION’S PARTICIPATION IN THE...
15 October 2016

Partnership for Global Peace and Stability. Joint Statement...

President of the Russian Federation, H.E. Mr. Vladimir V. Putin and Prime Minister of the Republic of India, H.E. Mr. Narendra Modi met today in Goa,...
15 August 2016

President Putin's congratulatory telegram on the occasion of...

Unofficial translationMoscow, Kremlin August 11, 2016Esteemed Mr President,Esteemed Mr Prime Minister,Accept my cordial greetings on the occasion of the...
Emergency phone number only for the citizens of Russia in emergency in India +91-81-3030-0551
Address:
Shantipath, Chanakyapuri,
New Delhi - 110021
Telephones:
(91-11) 26873799; 26889160;
Fax:
(91-11) 26876823
E-mail:
This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.