“भारत में राजदूत के रूप में मेरी नियुक्ति का मेरे लिए मतलब यह है कि मैं उस देश में जा रहा हूँ जो मेरे दिल में बसा हुआ है।“

Friday, 06 November 2009 04:16

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रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने अलेक्सांदर कदाकिन को भारत में रूस के राजदूत
के पद पर नियुक्त किया है। 5 नवम्बर को अलेक्सांदर कदाकिन रूस के राजदूत के रूप में नई दिल्ली पहुँच गए और अपना कार्यभार सम्भाल लिया। मास्को से नई दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले अलेक्सांदर कदाकिन ने हमारी विशेष संवाददाता सुश्री नतालय बेन्यूख को एक इंटरव्यू दिया। यह इंटरव्यू आपकी सेवा में प्रस्तुत है –

- भारत में रूस के राजदूत के पद पर आपकी नियुक्ती का फैसला आपको कैसा लगा?

- इस नियुक्ती को मैं इस तरह ले रहा हूँ कि मैं अपने घर ही वापस जा रहा हूँ। विगत
शताब्दी के आठवें दशक में मैंने अपनी राजनयिक सेवा भारत में सोवियत दूतावास में
तीसरे सचिव के रूप में काम करके शुरु की थी। नौवें दशक में और अंतिम दशक के शुरू में मैं वहां पर सह राजदूत के पद पर रहा था। सन् 1999 से 2004 तक मैं भारत में रूस के राजदूत के पद पर रहा। और अब मैं यह स्वीडन में रूस का राजदूत रहने के बाद फिर से भारत जा रहा हूँ जो मेरे दिल को अति प्रिय है। इस देश में मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। मैं वास्तव में उन से हमेशा सम्पर्क बनाए रखा है। हम एक दूसरे से पत्राचार करते रहे हैं। मुझे उनसे फिरसे मिलकर अति प्रसन्नता होगी। भारतीयों की एक अवधारणा है — "कर्म भूमि"। जाहिर है कि भारत मेरी "कर्म भूमि" है। और मैं भारत वापस जाने पर बहुत खुश हूँ।

- आप रूसी-भारतीय सम्बन्धों की वर्तमान स्थिति का कैसा मूल्यांकन करेंगे?

- रूसी-भारतीय सम्बन्धों का वर्तमान स्तर संतोषजनिक है।

वे विकास कर रहे हैं। हम संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में सफलतापूर्वक सहयोग कर रहे हैं। हमारे देश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ मिलकर प्रयास कर रहे हैं। भारत और रूस के बीच सम्बन्ध विश्व कूटनीति का एक विलक्षण उदाहरण हैं। यह सम्बन्ध कभी भी झगड़ों और गलतफहमियों का शिकार नहीं बने। आजकल इन सम्बन्धों का ठोस संविदात्मक — कानूनी आधार है। रूस और भारत सामरिक साझेदारी का विकास कर रहे हैं।

- और फिर भी निश्चित रूप से कुछ समस्याएं भी होंगी। उनका हल निकालने के लिए कौनसे उपाय किए जा रहे हैं?

- स्वेतोस्लाव रोरिक मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त थे। उन्होंने एक बार कहा था "चुनौतियों का सामना करते हुए हम और मज़बूत बन जाते हैं। हम इन चुनौतियों को बातचीत के माध्यम से दूर करते हुए आगे बढ़ते जाएँगे। रूस और भारत अपने व्यापारिक और आर्थिक सम्बन्धों को एक नए स्तर तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे दो देश वर्ष 2010 तक परस्पर व्यापार का स्तर 10 अरब डॉलर तक पहुँचाना चाहते हैं। अभी तक हमारे व्यापारिक और आर्थिक सम्बन्ध उतनी तेज़गति से विकास नहीं कर रहे हैं जितनी कि हमारे देशों की क्षमता है। इन सम्बन्धों का तेज़गति से विकास करने के लिए रूस और भारत में निजी पूंजी का सक्रिय रूप से उपयोग किया जाना चाहिए। सैन्य तकनीकी सहयोग रूसी-भारतीय सहयोग का एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। इस क्षेत्र में रूस हर देश से उतना गहरा सहयोग नहीं करता है जितना भारत से करता है। मुझे यकीन है कि दोनों पक्ष रूस क्रूजर के लिए 'एडमिरल गोर्शकोव' को भारत के लिए लैस करने के सभी मौजूदा सवालों का हल निकाल लेंगे।

- वर्ष 2008 और वर्ष 2009 में हमारे दो देशों ने एक दूसरे के राष्ट्रीय साल मनाए हैं। आप इनका मूल्यांकन करते हुए क्या कहना चाहेंगे?

- रूस और भारत में मनाए गए एक दूसरे के राष्ट्रीय वर्षों का हमारे सहयोग के सभी क्षेत्रों के लिए सर्वोच्च महत्व है। और विशेष रूप से सांस्कृतिक सम्बन्धों के विकास के लिए। एक दूसरे देश के गीत- संगीत, नृत्यों, साहित्य, सिनेमा और अन्य कलाओं का ज्ञान हासिल करने से इन देशों के लोगों के बीच आपसी समझ बूझ को बेहतर बनाने में योगदान मिलता है। इन दो वर्षों के दौरान दोनों देशों के वैज्ञानिकों, व्यवसायिकों और शिक्षकों के बीच संपर्क बढ़े हैं। वास्तव में ऐसे राष्ट्रीय वर्ष — सार्वजनिक कूटनीति का एक प्रभावी और कुशल रूप हैं।

- दिल्ली में रूस के राजदूत के रूप में आप अपने कार्यों के पहले दिनों में किस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे?

- दिसंबर माह के शुरू में मास्को में आगामी रूस-भारत शिखर सम्मेलन की तैयारियां की जा रही हैं। अभी हाल ही में मास्को में रूस और भारत के बीच व्यापारिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर्सरकारी आयोग की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें भाग लेने के भारत के विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा रूस आए थे। अंतर्सरकारी आयोग की बैठक में हमारे देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं और भविष्य के लिए अपने उद्देश्यों पर चर्चा की गई। अगले कुछ दिनों में नई दिल्ली में दुपक्षीय बैठकें आयोजित की जाएँगी। अपने इंटरव्यू के अंत में राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन ने कहा कि आगामी रूस — भारत शिखर बैठक के दौरान रूस के नेताओं और भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच होने वाली बातचीत से दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मज़बूत होगी।

VOICE OF RUSSIA, November 5, 2009

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