शिमला में रेरिख़ ट्रस्ट के संरक्षक-बोर्ड की बैठक

Wednesday, 24 December 2014 19:24

पश्चिमी हिमालय की गोद में बसे नग्गर गाँव में स्थित रेरिख़ की जागीर में बने संग्रहालय के संरक्षण और विकास के लिए आपस में सहयोग बढ़ाने के सवाल पर रूस और भारत के बीच आपस में सहमति हो गयी है।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 20 दिसम्बर को अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ स्मारक ट्रस्ट के संरक्षक-बोर्ड की 17 वीं बैठक के दौरान दोनों देशों के लोगों को जोड़ने और उनके बीच समीपता बढाने में अपूर्व भूमिका निभाने वाले इस महान स्थल के संरक्षण और विकास के लिए सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गयी। अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ मेमोरियल ट्रस्ट के प्रमुख एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भारत में रूस के राजदूत‍ अलेक्सान्दर कदाकिन ने भी हिस्सा लिया। वे अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ स्मारक ट्रस्ट के उप-प्रमुख, संस्थापक और आजीवन ट्रस्टी हैं। उनके अलावा अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ केन्द्र, मास्को के अध्यक्ष ए०पी० लस्यूकोव, रूसी संस्कृति विभाग ’रोससत्रूदनिचेस्तवा’ के भारत में प्रतिनिधि एफ़०ए० रजोव्स्की, अन्य रूसी राजनयिकों और रूस की तरफ से संग्रहालय की प्रभारी एल० सूर्गिना ने भी हिस्सा लिया।

बैठक में रूस के दूतावास और अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ केन्द्र, मास्को द्वारा संयुक्त रूप से एजेण्डे के लिए प्रस्तुत व्यापक सुझावों पर चर्चा की गई। इनमें प्राथमिक आवश्यकताओं, वर्तमान चुनौतियों और संयुक्त कार्य के विकास के लिए प्रगतिशील क्षेत्रों को निर्धारित करने से सम्बन्धित सुझाव रखे गए। बैठक में अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ स्मारक ट्रस्ट के ढाँचे में सुधार, नग्गर के संग्रहालय परिसर के स्टाफ के वेतनों में वृद्धि, रेरिख़ की जागीर के परिसर में वृक्षारोपण तथा औषधीय पौधों का रोपण आदि लक्ष्य निर्धारित किये गए। रेरिख़ की जागीर और संग्रहालय की मरम्मत और उसकी बहाली को प्राथमिकता दी गई। रूसी विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गयी विस्तृत योजना के आधार पर रेरिख़ के घर की पुरानी इमारत को फिर से उसका प्रारम्भिक रूप प्रदान करने और वहाँ इस अनूठे रूसी परिवार के जीवन और सृजन का परिचय कराती एक अद्यतन प्रदर्शनी का आयोजन करने का निर्णय लिया गया। इस काम में अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ केन्द्र, मास्को आर्थिक मदद करेगा।

बैठक में बोलते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह ने आश्वासन दिया कि प्रदेश की सरकार अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ स्मारक ट्रस्ट की गतिविधियों को सक्रिय बनाने और नग्गर में स्थित रेरिख़ की जागीर को उन सभी भारतीय नागरिकों, भारत आने वाले रूसी पर्यटकों और दूसरे देशोंसे आने वाले रेरिख़ के अनुयायियों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के लिए सभी आवश्यक प्रयास करेगी, जो उनकी अमूल्य कलात्मक, वैज्ञानिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक विरासत का मूल्य समझते हैं। हाल ही में प्रदेश की सरकार ने अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ स्मारक ट्रस्ट के लिए 30 लाख रूपये आबण्टित किए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश केनिवासी सही मायने में इस बात पर गर्व का अनुभव करते हैं कि रेरिख़ परिवार भारत की भूमि पर रहता और काम करता था।

भारत में रेरिख़ परिवार रूस के एक दूत की तरह था। रूस के साथ हमारे मैत्री और सहयोग-सम्बन्ध दीर्घकालिक मज़बूत धागों से बंधे हुए हैं।

भारत में रूस के राजदूत अलेक्सान्दर कदाकिन ने कहा कि इस हिमालय क्षेत्र में रेरिख़ का यह स्मारक रूसी संस्कृति के एक वैसे ही संरक्षित खज़ाने के समान है जैसा मिखाइलव्स्कोए में स्थित पूश्किन स्मारक और यस्नाया पल्याना में स्थित तलस्तोय स्मारक। उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय रेरिख़ स्मारक ट्रस्ट के विकास को दोनों देशों के वरिष्ठ नेतृत्व ने रूसी-भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्धों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना माना है। अपने भारतीय सहयोगियों के साथ मिलकर हम नग्गर के इस स्मारक परिसर को अपने हमवतनों की स्मृति में स्थापित एक विश्व स्तरीय सांस्कृतिक, शैक्षिक और वैज्ञानिक केंद्र में बदलने के लिए सतत प्रयास करते रहेंगे। भारत स्थित रूस के राजदूत ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और रूस के एक अच्छे सहयोगी वीरभद्र सिंह को रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन की भारत यात्रा के उपलक्ष्य में रूसी दूतावास और रूसी कम्पनी ‘सिस्तेमा’ द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक ‘वसीली वेरेषागिन : भारतीय कविता’ भी भेंट स्वरूप दी।

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