भारत के साथ सहयोग में रूसी प्रदेशों की अग्रणी भूमिकाः राजदूत कदाकिन

Wednesday, 24 December 2014 19:14

भारत में रूस के राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन ने कहा है कि रूस और भारत के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को विकसित करने में रूसी प्रदेशों की भूमिका अग्रणी होगी। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए "उत्तर-दक्षिण" नामक इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आई.टी.सी.) यानी अंतर्राष्ट्रीय परिवहन गलियारे के शीघ्रतम निर्माण के महत्व पर भी बल दिया।

राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन ने रेडियो "स्पूतनिक" की विशेष संवाददाता, नतालिया बेन्यूख़ को एक साक्षात्कार दिया जिसमें उन्होंने वर्ष 2014 में रूसी-भारतीय सहयोग के परिणामों की समीक्षा की-

अलेक्सांदर कदाकिन ने कहा कि निवर्तमान वर्ष 2014 इस बात के लिए सभी आवश्यक शर्तें पूरी करता है कि यह वर्ष रूसी-भारतीय सहयोग के विकास में एक युगांतरकारी वर्ष और एक मील का पत्थर बनने जा रहा है। पूर्वी देशों के साथ सहयोग करने की दिशा में रूस की नीति में आया परिवर्तन और भारत में एक उद्देश्यपूर्ण व्यावहारिक प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी की स्थिर सरकार का सत्ता में आना- ये दो ऐसे शक्तिशाली कारक हैं जो रूसी-भारतीय संबंधों के तीव्र विकास के लिए उत्प्रेरक के रूप में निःसंदेह काम करेंगे। इस वर्ष की मुख्य राजनीतिक घटना- दिसम्बर माह में नई दिल्ली में हुए शिखर सम्मेलन- के परिणामों को बेहद सफल कहा जा सकता है। इन परिणामों ने इस बात की स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि हमारी विशेषाधिकार सम्पन्न रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने के अलावा राजनीतिक, व्यापारिक और सैन्य-तकनीकी, आर्थिक, वैज्ञानिक और मानवीय संबंधों को एक नया आयाम प्रदान करने की हमारे देशों की नीति आगे भी जारी रहेगी। वाणिज्यिक प्रकृति के दस्तावेज़ों के एक ठोस पैकेज पर हस्ताक्षर किए गए हैं जो हमारे द्विपक्षीय आर्थिक तथा व्यापारिक संबंधों में नई सांस फूँक देगा और इन संबंधों को नई शक्ति प्रदान करेगा।

हमारे पिछले शिखर सम्मेलन की एक विशेष बात यह है कि यह एक कठिन राजनीतिक दौर में आयोजित किया गया था जब पश्चिम के द्वारा रूस के विरुद्ध प्रतिबंध लगाकर उस पर अभूतपूर्व दबाव डाला जा रहा था और हमारे देश को अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता का त्याग करने को विवश करने के प्रयास किए जा रहे थे। इस पृष्ठभूमि में शिखर सम्मेलन के परिणाम अधिक उल्लेखनीय रूप से दिखाई देते हैं। भारतीय नेता और जनता रूस के विरुद्ध प्रतिबंधों की पश्चिमी देशों की नीति को बिल्कुल स्वीकार नहीं करते हैं। रूसी प्रतिनिधिमंडल में क्रीमिया गणराज्य के नेता की भागीदारी इस बात का एक ज्वलंत सबूत है, जिन्होंने नई दिल्ली में भारत के व्यापारिक हलकों के साथ अपने गणराज्य के सहयोग पर एक समझौता- ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।

यह रूस के राष्ट्रपति की भारत के नए प्रधानमंत्री के साथ पूर्ण स्तर की पहली वार्ता भी थी। यह शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों को नई गुणवत्ता और नया सार प्रदान करने वाला सम्मेलन सिद्ध हुआ है और जटिल अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में इस सम्मेलन की ख़ास बात यह है कि हमारे देशों ने पूरी दुनिया को बता दिया है कि वे रणनीतिक साझेदार और सहयोगी थे, अब भी हैं और हमेशा ऐसे साझेदार और सहयोगी बने रहेंगे।

- यह कोई रहस्य की बात नहीं है कि पिछले कुछ वर्षों से दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच 11 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है जो कि हमारे देशों के लिए बहुत मामूली है। व्यापारिक संबंधों के क्षेत्र में भी कोई बहुत ज्यादा गतिविधियां नहीं हो रही हैं। हालांकि, रूस के राष्ट्रपति की हाल ही में की गई भारत यात्रा के दौरान हमारे नेताओं ने वर्ष 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन आपकी राय में इस लक्ष्य को कैसे हासिल किया जा सकता है? हमारे इस सवाल का जवाब देते हुए राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन ने कहा-

- आप की बात सही है। दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बढ़ाने की ज़रूरत है। आजकल दोनों देशों के बीच व्यापार का स्तर उनकी मौजूदा क्षमताओं और उनके बीच राजनीतिक संबंधों के स्तर से काफी पीछे है। वर्ष 2013 के अंत तक इस व्यापार में कुछ गिरावट भी दर्ज की गई थी। दोनों देशों के बीच केवल दस अरब डॉलर का ही व्यापार हुआ था। देखा जाए तो रूस और भारत जैसी विश्व की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह आँकड़ा बहुत मामूली है। रूसी-भारतीय व्यापारिक संबंधों का विषय- विगत शिखर सम्मेलन का एक केंद्रीय विषय था। हमारे नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाने और निवेश बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने के मुद्दे पर चर्चा की थी और निजी व सरकारी कंपनियों के बीच घनिष्ठ सहयोग करने और आपसी लेन-देन में राष्ट्रीय मुद्राओं का अधिक उपयोग करने के उद्देश्य से उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए अपनी सहमति व्यक्त की थी।

मुझे लगता है कि बड़ी-बड़ी सरकारी कंपनियों और छोटे व मध्यम उद्यमों के बीच व्यापारिक-आर्थिक संबंधों को गहन बनाकर आपसी व्यापार को बढ़ाया जा सकता है। शिखर सम्मेलन के दौरान आर्थिक क्षेत्र में समझौतों के एक प्रमुख पैकेज पर हस्ताक्षर किए गए थे। इन समझौतों का संबंध तेल और गैस के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करने के लिए एक अंतर-सरकारी कार्यक्रम, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग के विस्तार के लिए रणनीतिक दृष्टि, "रोसनेफ्त" और "एस्सार" ऑयल लिमिटेड के बीच एक निर्यात-अनुबंध से भी है जिसके अंतर्गत भारत को 10 साल तक की अवधि में प्रति वर्ष 5 अरब अमरीकी डॉलक के मूल्य के तेल की आपूर्ति की जाएगी। "अलरोसा" और भारतीय कंपनियों के बीच हीरों की आपूर्ति संबंधी 2.1 अरब डॉलर के मूल्य के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसी तरह से भारतीय कंपनी एन.एम.डी.सी. ने रूस में पोटाश के भंडारों का विकास करने के लिए रूस की "अक्रोन" कंपनी के साथ 70 करोड़ अमरीकी डॉलर के मूल्य के शेयर ख़रीदने का ज्ञापन-समझौता किया है।

इन और अन्य समझौतों के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप हम आने वाले वर्षों में आपसी कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि जिन अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं उनकी कुल धनराशी 100 अरब अमरीकी डॉलर बनती है!

नई राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए हम इस बात की उम्मीद कर सकते हैं कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के बीच सहयोग बढ़ेगा। भारत से खाद्य उत्पादों और, विशेष रूप से, मांस और डेयरी उत्पादों की रूसी बाज़ार के लिए आपूर्ति की जाएगी।

- राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन ने कहा कि 1 जनवरी 2015 से यूरेशियन आर्थिक संघ की कार्य-गतिविधियां शुरू होने से रूसी-भारतीय व्यापार और आर्थिक सहयोग के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुल जाएंगे। भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ के ढांचे के अंदर व्यापक आर्थिक सहयोग का एक समझौता करने के सवाल पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए विशेष रूप से गठित एक द्विपक्षीय कार्यदल का काम निकट भविष्य में शुरू हो जाएगा। इस बात का भी कोई कम महत्व नहीं है कि आपसी सुरक्षा और निवेश के प्रोत्साहन संबंधी रूसी-भारतीय समझौते का आधुनिकीकरण किया जाएगा। रूसी राजदूत ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 30 अरब अमरीकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन ने अंतर्राष्ट्रीय परिवहन गलियारा 'उत्तर-दक्षिण' के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा-

- अंतर्राष्ट्रीय परिवहन गलियारा "उत्तर-दक्षिण"- यह यात्रियों और मालों की ढुलाई का एक बहुविध परिवहन मार्ग है जिसकी मुंबई बंदरगाह से लेकर सेंट पीटर्सबर्ग तक कुल लंबाई 7200 किलोमीटर है। इस परियोजना का उद्देश्य- भारत, ईरान और फारस की खाड़ी के अन्य देशों से कैस्पियन सागर के रास्ते रूस तक और इससे आगे उत्तरी और पश्चिमी यूरोप तक मालों की ढुलाई के लिए सबसे अच्छे अवसर पैदा करना है। इसकी बदौलत मालों की ढुलाई के लिए समय और धन, दोनों की काफ़ी बचत होगी।

फिलहाल इस गलियारे ने अपनी पूरी क्षमता के अनुसार काम करना शुरू नहीं किया है। आजकल केवल परीक्षण मोड में ही कुछ मालों की ढुलाई की जाती है। हालांकि, मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहता हूँ कि रूस ने पहले से किए गए समझौतों के अंतर्गत इस परियोजना से जुड़े अपने सभी दायित्वों को पूरा कर दिया है। हम अपने यहाँ मालों को लेने के लिए तैयार हैं: आस्त्राख़न से एक उपयुक्त रेलवे के बुनियादी ढांचे की स्थापना कर दी गई है, कैस्पियन सागर पर "ओल्या" नामक एक बड़ी बंदरगाह ने काम करना शुरू कर दिया है। अभी हाल तक ईरान के इलाके में उचित रेलमार्ग की व्यवस्था नहीं होने के कारण इस परियोजना के काम को जारी रखने में रुकावटें पड़ रही थीं, लेकिन निर्माण-कार्य सक्रिय रूप से किए जा रहे हैं और, हमारी जानकारी के अनुसार, वे पूरे होने को हैं। भारत की भी इस मार्ग के शीघ्रतम खुलने में गहरी दिलचस्पी है। इस रास्ते से एक बार गाड़ियों के गुज़र जाने से इस परियोजना की जीवन-शक्ति और इसकी आर्थिक व्यवहार्यता सिद्ध हो गई है।

- रूसी राजदूत ने रूस और भारत के बीच अंतर-क्षेत्रीय संबंधों के विकास का भी उल्लेख किया। अलेक्सांदर कदाकिन ने ज़ोर देकर कहा कि ऐसे संबंध हमारे देशों के बीच व्यापारिक, आर्थिक और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता देते हैं।

- यह बात कहते हुए मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही है कि हाल के वर्षों में इस दिशा में सकारात्मक प्रगति हुई है। 2014 का वर्ष बहुत उपयोगी वर्ष निकला है।17 से 19 नवम्बर तक ततारस्तान गणराज्य के राष्ट्रपति मिन्नीख़ानोव ने नई दिल्ली और मुंबई की यात्रा की थी जिसके बहुत ही व्यावहारिक परिणाम निकले हैं। मिन्नीख़ानोव के साथ गए प्रतिनिधिमंडल में ततारस्तान गणराज्य की सरकार के मंत्री और इस गणराज्य की सबसे बड़ी कंपनियों के प्रमुख भी शामिल थे। इस यात्रा के दौरान भारत सरकार के प्रमुख मंत्रियों के साथ बैठकों का आयोजन किया गया, पहला ततारस्तान-भारत बिज़नेस फोरम आयोजित किया गया, जिसे बहुत भारी सफलता प्राप्त हुई। ततारस्तान गणराज्य के चैंबर ऑफ कॉमर्स और भारतीय औद्योगिक परिसंघ के बीच एक समझौता-ज्ञापन पर और ततारस्तान गणराज्य की निवेश-विकास एजेंसी तथा कुछ भारतीय कंपनियों के बीच सहयोग संबंधी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

- और यह अंतर-क्षेत्रीय संबंधों के विकास का एकमात्र उदाहरण नहीं है। पूरे हो रहे चालू साल में एसोसिएशन ऑफ इंडियन कॉमर्स चैंबर्स और रूस के कलूगा प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यमिता सहायता कोष के बीच आशय के एक प्रोटोकोल पर हस्ताक्षर किए गए थे। रूस के एक अन्य प्रदेश तोम्स्क से छोटे और मध्यम व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिणी भारत के दो सबसे बड़े शहरों, चेन्नई और बंगलौर का दौरा किया था वहाँ नवीनतम प्रौद्योगिकी, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों, जल-उपचार और ठोस कचरे की रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में सहयोग के संबंध में एक ज्ञापन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

भारत में रूसी दूतावास और मुंबई में रूस के महावाणिज्य दूतावास द्वारा रूस के आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके, क्रीमिया गणराज्य के साथ पूर्ण साझेदारी स्थापित करने के लिए तैयार भारतीय भागीदारों को खोजने का काम- गुणात्मक दृष्टि से रूसी-भारतीय अंतर-क्षेत्रीय सहयोग की एक नई दिशा है। एस. वी. अक्सियोनोव की पहली भारत यात्रा के दौरान "भारत-क्रीमिया साझेदारी" नामक एक व्यापारिक संघ के साथ सहयोग के बारे में एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौता-ज्ञापन के अंतर्गत इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक और औद्योगिक परिसरों के निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा। हम भारतीय कंपनियों के साथ संबंधों को मज़बूत बनाने के काम में आगे से भी क्रीमिया गणराज्य के निवासियों की मदद करनी जारी रखेंगे।

- राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन ने विश्वास व्यक्त किया कि 2015 का आगामी वर्ष भी कम फलदायक नहीं होगा। जनवरी 2015 के मध्य में भारत के सबसे बड़े "ऊर्जावान गुजरात" नामक सातवें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश फोरम में रूसी प्रदेशों की भागीदारी के लिए तैयारी पहले से ही शुरू हो चुकी है। उम्मीद है कि रूस के आस्त्राख़न प्रदेश के गवर्नर अलेक्सांदर झीलकिन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल, अल्ताई प्रदेश और खांती-मानसीस्क स्वायत्त ज़िले-यूग्रा के प्रतिनिधिमंडल निकट भविष्य में भारत की यात्राएँ करेंगे। खांती-मानसीस्क स्वायत्त ज़िले की सरकार ने भारतीय राज्यों महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिमी बंगाल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा की सरकारों के साथ सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग संबंधी समझौते करने का प्रस्ताव रखा है।

वोल्गोग्राद प्रदेश की सरकार ने तमिलनाडु राज्य के साथ सरकारी स्तर पर भागीदारी स्थापित करने के अपने इरादे की घोषणा की है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई और वोल्गोग्राद के बीच भाईबंदों वाले संबंध स्थापित हैं। मास्को और नई दिल्ली के बीच संबंध परंपरागत रूप से मज़बूत हैं। उम्मीद है कि वर्ष 2015 में मास्को प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल भारत की यात्रा करेगा।

Popular articles

09 February 2018

Russian Ambassador H.E. Mr Nikolay Kudashev gave an...

Russian military relations with Pakistan very minimal, says Russian envoy Nikolay Kudashev Suhasini Haidar, Dinakar Peri Russia’s new Ambassador to...
30 January 2018

Statement by the Russian Embassy on the conferment...

It is with great satisfaction that we learned about the conferment posthumously of the Padma Bhushan Award on late Ambassador Extraordinary and...
09 February 2018

Russian Diplomat’s day in New Delhi

On February 9, the Russian Embassy in New Delhi hosted a solemn function on the occasion of the Diplomats’ Day. Representatives of the Ministry of...
Emergency phone number only for the citizens of Russia in emergency in India +91-81-3030-0551
Address:
Shantipath, Chanakyapuri,
New Delhi - 110021
Telephones:
(91-11) 2611-0640/41/42;
(91-11) 2687 38 02;
(91-11) 2687 37 99
E-mail:
This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.