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भारत में रूस के राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन का इंटरव्यू

Thursday, 05 June 2014 16:31

भारत में रूस के राजदूत अलेक्सांदर कदाकिन ने पाकिस्तान को रूसी हथियारों की सप्लाई के सवाल पर भारतीय मीडिया और टेलीविज़न चैनल "टाइम्स नाउ" के प्रतिनिधियों को एक इंटरव्यू दिया।

टीवी चैनल "टाइम्स नाउ": राजदूत महोदय, हमने सुना है कि रूस ने अपनी नीति बदलकर पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति शुरू कर दी है। ऐसा क्यों हुआ है?

अलेक्सांदर कदाकिन: सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहता हूँ कि रूस ने अपनी नीति नहीं बदली है। बेशक मीडिया में इस तरह की कुछ ख़बरें आई हैं, लेकिन रूस ने कभी भी पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था। इसलिए, ऐसा कोई प्रतिबंध मौजूद नहीं है जिसे हटाया जाए। 1960 के दशक में हमने इस देश को हथियारों की आपूर्ति की थी। कुल मिलाकर यह किसी स्रोत का ग़लत हवाला देने और उस पर ज़रूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया करने का एक स्पष्ट उदाहरण है।

रूस ने हाल के वर्षों में पाकिस्तान को किसी भी तरह के हथियारों की आपूर्ति नहीं की है। उसने पाकिस्तान को केवल एम.आई.-17 वर्ग के असैनिक हैलीकाप्टरों की आपूर्ति की है। यह जानकारी सच्ची है कि पाकिस्तान को एम.आई.-35 वर्ग के हैलीकाप्टरों की आपूर्ति के मुद्दे पर बातचीत शुरू की गई है। लेकिन ऐसे रूसी हैलीकाप्टरों का इस्तेमाल केवल आतंकवाद से लड़ने और नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए ही किया जा सकता है। रूस आतंकवाद विरोधी और मादक पदार्थों की तस्करी विरोधी एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन का सदस्य है और वह समझता है कि पाकिस्तान भी इस संघर्ष में भाग लेकर अपना योगदान कर सकता है।

टीवी चैनल "टाइम्स नाउ": आपने देखा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और पाकिस्तान के कुछ राजनीतिक हलकों के तालिबान के साथ बहुत मज़बूत संबंध हैं। हामिद करज़ई ने अभी हाल ही में "टाइम्स नाउ" को बताया था कि मुल्ला उमर पेशावर या क्वेटा में ही रहता है। इस तथ्य का रूस और भारत के बीच संबंधों पर कैसा प्रभाव पड़ सकता है, यदि इस बात को भी ध्यान में रखा जाए कि इस बात का संबंध वैश्विक सुरक्षा के मुद्दे से भी है?

अलेक्सांदर कदाकिन: उच्चतम स्तर पर यह बात बार-बार दोहराई गई है कि हम ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे कि भारत के साथ रूस की गहरी रणनीतिक साझेदारी को कोई क्षति पहुंचने की संभावना हो। आतंकवाद के विरुद्ध अभियान में हम सदा भारत के साथ रहे हैं। जब हथियारों की आपूर्ति ही नहीं की जा रही है तो रूस और भारत के बीच संबंधों पर प्रभाव कैसे पड़ सकता है? पाकिस्तान को हथियारों की कोई आपूर्ति नहीं की जा रही है। इस इलाके में ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा है और न ही कभी ऐसा किया जाएगा जो रूस और भारत के बीच मज़बूत संबंधों को कमज़ोर कर सकता हो या इस इलाके में रणनीतिक संतुलन को बदल सकता हो।

वास्तव में, बातचीत चल रही है। पाकिस्तान ने शायद अपनी "इच्छा सूची" में यह लिखा हो कि उसे क्या चाहिए, लेकिन हमने इस पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। हर बात का फैसला केवल बातचीत के ज़रिए ही किया जाना चाहिए।

टीवी चैनल "टाइम्स नाउ": रूस के उप-प्रधानमंत्री निकट भविष्य में भारत की यात्रा करने वाले हैं, और आपका वास्ता भारत की नई सरकार से पड़ेगा। आपकी राय में, इस मुद्दे पर कैसी प्रगति हो सकती है?

अलेक्सांदर कदाकिन: भारत सरकार के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने, उसका विस्तार करने और उसे नई शक्ति प्रदान करने के संबंध में हमारी भविष्यवाणियां बहुत ही सकारात्मक हैं। शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में हमारी बहुत महत्वाकांक्षी परियोजनाएँ मौजूद हैं। हमारी एक ऐसी ही परियोजना के अंतर्गत भारत में 14 से 16 परमाणु बिजली रिएक्टरों का निर्माण किया जाना है। रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी हमारी बहुत महत्वाकांक्षी योजनाएँ हैं। उदाहरण के लिए, हम पांचवीं पीढ़ी के विमान का निर्माण कर रहे हैं।

हमारे उप-प्रधानमंत्री दिमित्री रगोज़िन हमारे राष्ट्रपति के एक विशेष दूत के रूप में भारत आ रहे हैं। वह भारत के साथ सहयोग के लिए ज़िम्मेदार हैं और अंतर-सरकारी आयोग के सह-अध्यक्ष भी हैं। हमें पूरा यकीन है कि भारत के प्रधानमंत्री, विदेशमंत्री सुश्री सुषमा स्वराज और अन्य मंत्रियों के साथ उनकी बातचीत अत्यंत फलप्रद होगी। आपके नए प्रधानमंत्री के साथ हमारे संबंध तब भी बहुत मज़बूत थे जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। हमने कभी भी कोई "काली सूची" नहीं बनाई है। उन्होंने तीन बार रूस की सफल यात्राएँ की हैं, और हमारे अस्त्रख़ान प्रदेश के गुजरात के साथ में बहुत घनिष्ठ संबंध हैं। इस स्तर पर हमारे लिए कोई भी समस्या मौजूद नहीं है। हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रधानमंत्री का उत्साह और विशिष्ट सहयोग परियोजनाओं पर उनकी पैनी नज़र सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी।

टीवी चैनल "टाइम्स नाउ": आपने रक्षा के क्षेत्र में सहयोग की बात की है। क्या रूस भारतीय सशस्त्र बलों को "आकूला" वर्ग की एक अन्य पनडुब्बी पट्टे पर दे सकता है?

अलेक्सांदर कदाकिन: आपके इस सवाल का जवाब देने से पहले हमें भारत की ओर से एक आधिकारिक अनुरोध-पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता है। भारत के समग्र हितों के इस विषय पर सामान्य-सी बात चली थी।

समाचार एजेंसी पी.टी.आई.: आपने परमाणु क्षेत्र में सहयोग का उल्लेख किया है। क्या रूस शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में पाकिस्तान को भी ऐसी ही सहायता प्रदान करने के लिए तैयार होगा?

अलेक्सांदर कदाकिन: मैंने इसके बारे में कभी सोचा ही नहीं। अन्य देशों से हमें बड़ी संख्या में आर्डर मिले हैं। हमारा अपना परमाणु ऊर्जा उद्योग अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा है ताकि खुद रूस में बिजली के उत्पादन के क्षेत्र में मिले सभी ठेकों को पूरा किया जा सके।

हमारे पास जो कुछ भी है उसे हम भारत के साथ साझा करते हैं। इसका संबंध परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हमारे सहयोग से भी है। आप जानते ही हैं पहले युनिट ने बिजली का उत्पादन सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है और वह अपनी 100 प्रतिशत क्षमता के अनुसार बिजली का उत्पादन कर रहा है। दूसरा रिएक्टर भी लगभग तैयार है और वह निकट भविष्य में चालू हो जाएगा। हमने तीसरे और चौथे युनिटों के निर्माण के संबंध में भी एक तकनीकी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके बाद हम, निश्चित रूप से, पांचवें और छठे, सातवें और आठवें ...युनिटों का निर्माण भी करेंगे। रूस इस क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत को ही असाधारण प्राथमिकता देता है। बात दरअसल यह है कि हमने इस क्षेत्र में एक “रोड मैप” पर हस्ताक्षर किए हुए हैं जिसके अंतर्गत हमने भारत में 14 से 16 परमाणु रिएक्टरों का निर्माण करना चाहिए।

June 06, 2014

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